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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Bank of Baroda के कमर्शियल लोन पर वसूली सिटेशन रद्द किया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि Bank of Baroda के कमर्शियल लोन की वसूली UP Public Moneys (Recovery of Dues) Act, 1972 के तहत नहीं हो सकती, और वसूली सिटेशन रद्द कर दिया।

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आधिकारिक स्रोतAllahabad High Court
कानूनी / 25 अक्टूबर 2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Bank of Baroda के एक कारोबारी कर्जदार के खिलाफ कानपुर के तहसीलदार द्वारा जारी वसूली सिटेशन रद्द कर दिया है। 15 अक्टूबर 2026 के फैसले में खंडपीठ ने कहा कि कमर्शियल लोन की वसूली उत्तर प्रदेश Public Moneys (Recovery of Dues) Act, 1972 के तहत जारी प्रमाणपत्र के जरिए नहीं की जा सकती। मामला 25 लाख रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा का था।

क्या हुआ

फैसले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं M/s Laptop Solution और एक अन्य ने Bank of Baroda की कानपुर स्थित Panki-1 शाखा से 25 लाख रुपये की कैश क्रेडिट सुविधा ली थी, और भुगतान अनियमित हो गया। बैंक ने Recovery of Debts and Bankruptcy Act, 1993 की Section 19 के तहत मूल आवेदन दायर किया, जो अभी डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल, इलाहाबाद में लंबित है।

इसी बीच 1972 के कानून की Section 3 के तहत वसूली प्रमाणपत्र जारी हुआ, और तहसीलदार, तहसील सदर, कानपुर नगर ने 24 सितंबर 2026 को सिटेशन जारी किया। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि जो कमर्शियल लोन किसी सरकारी योजना के तहत नहीं दिया गया, उसकी वसूली इस कानून के तहत नहीं हो सकती।

बैंक के वकील ने अदालत को बताया कि बैंक जवाब दाखिल नहीं करना चाहता और 5 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर, कानपुर नगर को पत्र लिखकर वसूली प्रमाणपत्र वापस ले चुका है। अदालत ने कहा कि सिटेशन जारी हो चुका है, इसलिए उस पर कानून के अनुसार फैसला जरूरी है। इसी अदालत के एक पूर्व फुल बेंच फैसले के आधार पर अदालत ने माना कि कमर्शियल लोन की वसूली के लिए 1972 के कानून के तहत प्रमाणपत्र पर आधारित सिटेशन साफ तौर पर गैरकानूनी और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने सिटेशन रद्द कर दिया और खर्च के बारे में कोई आदेश नहीं दिया।

इसका क्या मतलब है

कर्जदारों के लिए यह फैसला एक रेखा खींचता है: अदालत के अनुसार, जो कमर्शियल लोन किसी सरकारी योजना के तहत नहीं है, उसकी वसूली 1972 के कानून के तहत प्रमाणपत्र के जरिए नहीं की जा सकती। इस मामले में इसका मतलब था कि कारोबार के खिलाफ तहसीलदार का सिटेशन टिक नहीं सका।

फैसला कर्ज को खत्म नहीं करता। अदालत ने कहा कि बैंक अपना बकाया कानून के अनुसार वसूलने के लिए स्वतंत्र है, और डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल में बैंक का अपना वसूली आवेदन लंबित है।

स्रोत: High Court judgment

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।