कानूनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: 4,190 रुपये पर लियन लगाकर HDFC Bank खाता खोला जाए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि एक ग्राहक का फ्रीज़ किया गया HDFC Bank खाता 4,190 रुपये पर लियन लगाने के बाद खोला जाए और एक सप्ताह में उसे चलाने दिया जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 23 अक्टूबर 2026 को निर्देश दिया कि HDFC Bank में एक ग्राहक का फ्रीज़ किया गया खाता 4,190 रुपये पर लियन लगाने के बाद खोल दिया जाए। खंडपीठ ने आदेश दिया कि ग्राहक को आदेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर खाता चलाने की अनुमति दी जाए। RBI और पांच अन्य के खिलाफ दायर याचिका का इन्हीं निर्देशों के साथ निपटारा कर दिया गया।
क्या हुआ
खाताधारक ने संविधान के Article 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर HDFC Bank में अपने खाते को अनफ्रीज़ करने और उसका संचालन बहाल करने का निर्देश मांगा था। आदेश के अनुसार, खाते पर रोक इसलिए लगाई गई थी क्योंकि वह संदेह के घेरे में था या साइबर अपराध से जुड़ा बताया गया था।
पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत ने कहा कि 4,190 रुपये पर लियन लगाकर खाता खोल दिया जाए। लियन का मतलब है किसी तय रकम पर रोक: वह रकम निकाली नहीं जा सकती, जबकि बाकी खाते का इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इसके बाद खाताधारक को आदेश की तारीख से एक सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार खाता चलाने दिया जाए।
लियन वाली रकम जारी करने के बारे में अदालत ने बैंक को निर्देश दिया कि वह RBI के दिशानिर्देशों और इसी हाईकोर्ट द्वारा 2026 में तय एक पुरानी रिट याचिका में बताई गई प्रक्रिया का सख्ती से पालन करे। बैंक से यह भी कहा गया कि वह बिना अनावश्यक देरी के जल्द से जल्द आदेश का पालन करे।
इसका क्या मतलब है
जिन बैंक ग्राहकों के खाते साइबर अपराध से जुड़ाव के संदेह में फ्रीज़ किए जाते हैं, उनके लिए यह आदेश दिखाता है कि अदालत ने रोक को पूरे खाते के बजाय एक तय रकम तक सीमित किया। इस मामले में केवल 4,190 रुपये पर रोक रहेगी और खाता एक सप्ताह में इस्तेमाल के लिए खोला जाना है।
आदेश रोकी गई रकम को जारी करने को भी RBI के दिशानिर्देशों और अदालत द्वारा पहले तय प्रक्रिया से जोड़ता है, जिसका पालन बैंक को करना होगा।
जिन ग्राहकों को अपने खाते के साथ बैंक के व्यवहार को लेकर शिकायत है, वे RBI के शिकायत पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर जा सकते हैं। साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोग https://cybercrime.gov.in पर शिकायत कर सकते हैं या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर सकते हैं।
स्रोत: High Court judgment
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