कानूनी

NCDRC ने फर्जी लाइसेंस के बावजूद IndusInd General Insurance को क्लेम चुकाने का आदेश बरकरार रखा

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने IndusInd General Insurance की अपील खारिज कर दी और कार मालिक को वाहन का घोषित मूल्य 4% ब्याज के साथ चुकाने का आदेश बरकरार रखा।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 24 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 13 अक्टूबर 2026 को IndusInd General Insurance Co. Ltd. की वह अपील खारिज कर दी, जो एक कार मालिक के ओन-डैमेज क्लेम से जुड़ी थी जिसे बीमा कंपनी ने ठुकरा दिया था। आयोग ने बीमा कंपनी को वाहन का घोषित मूल्य चुकाने के आदेशों को बरकरार रखा। राज्य आयोग ने यह राशि 11,29,415 रुपये दर्ज की थी, जिस पर 26 नवंबर 2019 से 4% सालाना ब्याज देना होगा।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी ने 26 नवंबर 2019 को क्लेम इस आधार पर ठुकराया कि दुर्घटना के समय गाड़ी चला रहे ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। नौकरी पर रखते समय ड्राइवर ने पॉलिसीधारक को Sangli RTO से जारी और 2032 तक वैध लाइसेंस दिखाया था, जो बाद में फर्जी निकला। आदेश में दर्ज है कि बीमा कंपनी के सर्वेयर ने लाइसेंस को Sangli RTO से जारी होने की पुष्टि की थी।

जिला आयोग ने 5 जनवरी 2023 को शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की और महाराष्ट्र राज्य आयोग ने 13 मई 2026 को बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। मार्च 2020 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आधार पर राज्य आयोग ने कहा कि जो नियोक्ता देखने में असली लगने वाला लाइसेंस देखता है, उससे परिवहन कार्यालयों से उसकी सत्यता जांचने की अपेक्षा नहीं की जाती, और बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि ड्राइवर रखने में पॉलिसीधारक ने लापरवाही की।

NCDRC के सामने बीमा कंपनी ने दलील दी कि यह सिद्धांत थर्ड-पार्टी क्लेम पर लागू होता है, ओन-डैमेज क्लेम पर नहीं, और उसके सर्वे में नुकसान 8,67,004 रुपये आंका गया था। NCDRC ने कहा कि राज्य आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही तरह लागू किया और उसके आदेश में कोई अवैधता नहीं है।

बीमा कंपनी के अनुरोध पर आयोग ने पॉलिसीधारक को निर्देश दिया कि भुगतान मिलने पर वह क्षतिग्रस्त वाहन और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंप दे। दोनों पक्षों को यह काम चार हफ्तों के भीतर पूरा करना है।

इसका क्या मतलब है

ड्राइवर रखने वाले वाहन मालिकों के लिए आयोग ने माना कि अगर मालिक की लापरवाही साबित नहीं होती, तो ओन-डैमेज क्लेम सिर्फ इसलिए नहीं ठुकराया जाना चाहिए कि असली दिखने वाला लाइसेंस बाद में फर्जी निकला। आदेश यह भी दिखाता है कि जब बीमा कंपनी पूरा घोषित मूल्य (IDV) चुकाती है, तो वह क्षतिग्रस्त वाहन अपने कब्जे में ले सकती है। इस आदेश के खिलाफ अपील की जा सकती है। विवादित क्लेम वाले पॉलिसीधारक राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) या e-Daakhil के जरिए शिकायत कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।