कानूनी

NCDRC ने 340 दिन देर से दाखिल Tata AIG की अपील खारिज की

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Tata AIG General Insurance की दूसरी अपील खारिज कर दी और कहा कि 340 दिन की देरी के कारण संतोषजनक नहीं थे।

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आधिकारिक स्रोतConsumer commission
कानूनी / 24 अक्टूबर 2026

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने 13 अक्टूबर 2026 को Tata AIG General Insurance Co. Ltd की दूसरी अपील खारिज कर दी, क्योंकि वह 340 दिन की देरी से दाखिल की गई थी। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी के कारण, जो मुख्य रूप से आंतरिक प्रशासनिक देरी थे, संतोषजनक नहीं थे। इसके चलते कर्नाटक राज्य आयोग का 3 सितंबर 2025 का आदेश, जिसे बीमा कंपनी ने चुनौती दी थी, बरकरार रहा।

क्या हुआ

आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी ने राज्य आयोग के First Appeal No. 2071 of 2024 के आदेश के खिलाफ 24 सितंबर 2026 को दूसरी अपील दाखिल की। प्रतिवादी शिकायतकर्ता और LIC HFL Financial Services Ltd थे। बीमा कंपनी को राज्य आयोग के आदेश की प्रमाणित प्रति 18 सितंबर 2025 को मिल गई थी। 30 दिन की अनुमत अवधि को देखते हुए आयोग की रजिस्ट्री ने देरी 340 दिन आंकी।

बीमा कंपनी ने आयोग से देरी माफ करने का अनुरोध किया। आदेश के अनुसार, उसने कहा कि दस्तावेज उसके दफ्तर भेजे गए, आंतरिक रूप से घुमाए गए, अपील का फैसला बाद में लिया गया, नए वकील रखे गए और दस्तावेज तैयार करने, छापने और जुटाने में और समय लगा। उसने यह भी कहा कि निचले मंचों के निष्कर्ष गलत थे।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जिनके अनुसार देरी केवल "पर्याप्त कारण" होने पर ही माफ की जा सकती है, लापरवाही या सावधानी की कमी इसमें नहीं आती, और केवल मामले के गुण-दोष के आधार पर देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग ने पाया कि प्रमाणित प्रति मिलने की तारीख पर कोई विवाद नहीं था और बताए गए कारण मुख्य रूप से आंतरिक प्रशासनिक देरी थे। उसने देरी माफी की अर्जी नामंजूर कर दी और समय-सीमा के आधार पर अपील खारिज कर दी।

इसका क्या मतलब है

पॉलिसीधारकों और उनके परिवारों के लिए यह आदेश दिखाता है कि NCDRC ने लगभग एक साल देर से अपील दाखिल करने के लिए बीमा कंपनी की आंतरिक कागजी और मंजूरी प्रक्रिया को उचित कारण नहीं माना। आदेश में मूल दावे या उसमें शामिल रकम का ब्योरा नहीं दिया गया है।

NCDRC का आदेश आयोग का निष्कर्ष है और इसके खिलाफ अपील की जा सकती है। बीमा कंपनी से विवाद होने पर उपभोक्ता National Consumer Helpline (1915) से मदद ले सकते हैं या e-Daakhil पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्रोत: Consumer commission order

यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है। यह निवेश या वित्तीय सलाह नहीं है।